दावे दोस्ती के मुझे नहीं आते यारो,,
एक जान है जब दिल चाहे मांग लेना....
एक जान है जब दिल चाहे मांग लेना....
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निगाहों से भी चोट लगती है ...जनाब
जब कोई देख कर भी अनदेखा कर देता है.
जब कोई देख कर भी अनदेखा कर देता है.
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जाने क्यूँ
अब शर्म से,
चेहरे गुलाब नहीं होते।
जाने क्यूँ
अब मस्त मौला मिज़ाज़ नहीं होते।
पहले बता दिया करते थे,
दिल की बातें।
जाने क्यूँ अब चेहरे,
खुली किताब नहीं होते।
सुना है बिना कहे
दिल की बात समझ लेते थे।
गले लगते ही दोस्त
हालात समझ लेते थे।
तब ना फेस बुक थी,
ना स्मार्ट मोबाइल था,
ना फेसबुक, ना ट्विटर अकाउंट था,
एक चिट्टी से ही
दिलों के जज़्बात समझ लेते थे।
सोचता हूं
हम कहाँ से कहाँ आ गये,
प्रेक्टिकली सोचते सोचते
हम भावनाओं को खा गये।
अब भाई भाई से
समस्या का समाधान
कहां पूछता है,
अब बेटा बाप से
उलझनों का निदान
कहां पूछता है,
बेटी नही पूछती मां से
गृहस्थी के सलीके
अब कौन गुरु के चरणों में
बैठकर
ज्ञान की भाषा सीखे।
परियों की बातें
अब किसे भाती हैं
अपनो की यादें
अब किसे रुलाती हैं,
अब कौन
गरीबों को सखा बताता है
अब कहाँ
कृण्ण सुदामा को गले लगाता है।
जिन्दगी में
हम प्रेक्टिकल हो गये हैं
मशीन बन गये है सब
इंसान जाने कहाँ खो गये हैं!
इंसान जाने कहां खो गये है....!!!! ----
जाने क्यूँ
अब शर्म से,
चेहरे गुलाब नहीं होते।
जाने क्यूँ
अब मस्त मौला मिज़ाज़ नहीं होते।
पहले बता दिया करते थे,
दिल की बातें।
जाने क्यूँ अब चेहरे,
खुली किताब नहीं होते।
सुना है बिना कहे
दिल की बात समझ लेते थे।
गले लगते ही दोस्त
हालात समझ लेते थे।
तब ना फेस बुक थी,
ना स्मार्ट मोबाइल था,
ना फेसबुक, ना ट्विटर अकाउंट था,
एक चिट्टी से ही
दिलों के जज़्बात समझ लेते थे।
सोचता हूं
हम कहाँ से कहाँ आ गये,
प्रेक्टिकली सोचते सोचते
हम भावनाओं को खा गये।
अब भाई भाई से
समस्या का समाधान
कहां पूछता है,
अब बेटा बाप से
उलझनों का निदान
कहां पूछता है,
बेटी नही पूछती मां से
गृहस्थी के सलीके
अब कौन गुरु के चरणों में
बैठकर
ज्ञान की भाषा सीखे।
परियों की बातें
अब किसे भाती हैं
अपनो की यादें
अब किसे रुलाती हैं,
अब कौन
गरीबों को सखा बताता है
अब कहाँ
कृण्ण सुदामा को गले लगाता है।
जिन्दगी में
हम प्रेक्टिकल हो गये हैं
मशीन बन गये है सब
इंसान जाने कहाँ खो गये हैं!
इंसान जाने कहां खो गये है....!!!! ----
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उन बड़े बुज़ुर्ग की उंगलिओ में
कोई ताक़त तो ना थी;
मगर जब मेरा सर झुका,
तो सिर पर रखें काँपते हाथों ने,
ज़माने भर की दौलत दे दी...
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बहुत खामियां निकालने लगे हो आजकल मुझमें,
आओ एक मुलाकात आइने से जरा तुम भी कर लो...!
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जो हो गया उसे सोचा नहीं करते,
जो मिल गया उसे खोया नहीं करते,
हासिल उन्हें होती है सफलता,
जो वक्त और हालात पर रोया नहीं करते..
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जो मिल गया उसे खोया नहीं करते,
हासिल उन्हें होती है सफलता,
जो वक्त और हालात पर रोया नहीं करते..
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काँच को 'आईना' बनाने के लिए
उसके पीछे ''पारा'' चढ़ाया जाता है...
तभी तो जिसको ''आईना'' दिखाओ,
उसका ''पारा'' चढ़ जाता है......
उसके पीछे ''पारा'' चढ़ाया जाता है...
तभी तो जिसको ''आईना'' दिखाओ,
उसका ''पारा'' चढ़ जाता है......
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माँ तोड़ती थी पत्थर और
हांथो पर पड़ते छालें थे,
बाद कई मुद्दतों के
मेरे मुँह को पड़ते निवाले थे।
हांथो पर पड़ते छालें थे,
बाद कई मुद्दतों के
मेरे मुँह को पड़ते निवाले थे।
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लूट लेते हैं वही मुझको,
राह में मौका पा कर !
जो बातें अक्सर अपनेपन की,
किया करते हैं !!
राह में मौका पा कर !
जो बातें अक्सर अपनेपन की,
किया करते हैं !!
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आया जो ख़्याल उनका आंखें बरस पड़ीं,
आंसू किसी की याद के कितने करीब थे !
आंसू किसी की याद के कितने करीब थे !
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आज़मा ले मुझको थोडा,
ए खुदा और अभी…!
तेरा बंदा बस बिखरा हैं अब तक,
टूटा नही है अभी ..!!
ए खुदा और अभी…!
तेरा बंदा बस बिखरा हैं अब तक,
टूटा नही है अभी ..!!
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बाद मुद्दत के जो याद किया है तुमने,
ये भी मुझ पे अहसान किया है तुमने।
ये भी मुझ पे अहसान किया है तुमने।
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लूट लेते हैं वही मुझको,
राह में मौका पा कर !
जो बातें अक्सर अपनेपन की,
किया करते हैं !!
राह में मौका पा कर !
जो बातें अक्सर अपनेपन की,
किया करते हैं !!
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आया जो ख़्याल उनका आंखें बरस पड़ीं,
आंसू किसी की याद के कितने करीब थे !
आंसू किसी की याद के कितने करीब थे !
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आज़मा ले मुझको थोडा,
ए खुदा और अभी…!
तेरा बंदा बस बिखरा हैं अब तक,
टूटा नही है अभी ..!!
ए खुदा और अभी…!
तेरा बंदा बस बिखरा हैं अब तक,
टूटा नही है अभी ..!!
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छोटे से दिल मे गम बहुत है...
जिंदगी मे हर पल जख्म बहुत है...
मार डालती दुनिया कब की हमें ..
पर कम्बखत दोस्तों की
दुआओं मे दम बहुत हैं..!
दुआओं मे दम बहुत हैं..!